
Permissive Parenting आज के समय में एक ऐसा parenting style है जो तेजी से common होता जा रहा है। पहले जहां discipline और rules पर ज़ोर दिया जाता था, वहीं आज कई parents अपने बच्चों के साथ दोस्त जैसा रिश्ता बनाना चाहते हैं। यह बदलाव अच्छा भी है, लेकिन कभी-कभी यह balance बिगाड़ देता है।
एक बात हमें समझनी होगी—बच्चों का behavior अचानक नहीं बनता, वह उनके environment और parenting style का result होता है। यानी आप जिस तरह से बच्चे को guide करते हैं, वही उनके सोचने और behave करने का तरीका बन जाता है।
इसी context में एक parenting style है—Permissive Parenting, जो दिखने में बहुत प्यार भरा लगता है, लेकिन इसके कुछ hidden effects भी होते हैं।

Permissive Parenting एक ऐसा parenting style है जिसमें parents अपने बच्चों के साथ बहुत ज़्यादा soft और lenient approach अपनाते हैं। इस style में parents बच्चों को काफी freedom देते हैं, लेकिन उनके लिए clear rules या boundaries तय नहीं करते। आसान शब्दों में, Permissive Parenting का मतलब है—बच्चे की हर बात मान लेना, “ना” कम कहना और discipline को avoid करना। ऐसे parents अक्सर अपने बच्चे को upset नहीं करना चाहते, इसलिए वे उन्हें खुद ही decisions लेने देते हैं, चाहे बच्चा उस situation को handle करने के लिए तैयार हो या नहीं।
इस parenting style में प्यार और emotional support तो बहुत होता है, लेकिन guidance और control की कमी होती है। शुरुआत में यह तरीका बच्चों को comfortable और happy महसूस कराता है, लेकिन धीरे-धीरे यही Permissive Parenting उनके behavior को प्रभावित करने लगता है, क्योंकि उन्हें boundaries और limits की समझ develop नहीं हो पाती।
Permissive Parenting की मुख्य विशेषताएँ
अगर आप ये behaviors notice करते हैं, तो हो सकता है कि parenting style permissive हो:
👉 आप बच्चे को “ना” कहने में uncomfortable महसूस करते हैं।
👉 घर में clear rules या boundaries नहीं हैं।
👉 बच्चा अपनी हर demand मनवा लेता है।
👉 Discipline देने से आप बचते हैं।
👉 आप parent से ज्यादा friend बनने की कोशिश करते हैं।
यह सब शुरुआत में harmless लगता है, लेकिन धीरे-धीरे behavior पर असर दिखने लगता है।
Parents ऐसा क्यों करते हैं?

यह समझना बहुत जरूरी है कि parents जानबूझकर ऐसा नहीं करते। इसके पीछे कुछ emotional reasons होते हैं:
1. Guilt (समय न दे पाने का)
आज के busy lifestyle में parents को लगता है कि वे बच्चों को समय नहीं दे पा रहे, इसलिए वे उन्हें extra freedom दे देते हैं।
2. Strict upbringing का असर
कई parents खुद strict environment में बड़े हुए होते हैं, इसलिए वे अपने बच्चों के साथ वैसा नहीं करना चाहते।
3. Conflict से बचना
कुछ parents बच्चों के tantrums या गुस्से से बचने के लिए “ना” कहने से बचते हैं।
बच्चों के behavior पर इसका असर (Short-Term Effects)

शुरुआत में ऐसा लगता है कि बच्चा खुश है, लेकिन धीरे-धीरे कुछ changes दिखते हैं:
👉 बच्चा जिद्दी (Stubborn) हो जाता है।
👉 Frustration handle नहीं कर पाता।
👉 “ना” सुनने की आदत नहीं होती।
👉 Rules follow करने में difficulty होती है।
“जब बच्चे को हर बार ‘हाँ’ मिलती है, तो वह ‘ना’ को accept करना सीख ही नहीं पाता।”
Long-Term Effects: आगे चलकर क्या होता है?
यह effects समय के साथ और स्पष्ट हो जाते हैं:
👉 Decision-making में confusion.
👉 Responsibility लेने से बचना।
👉 दूसरों की boundaries को respect न करना।
👉 Emotional control की कमी।
👉 Real world challenges से डर लगना।
ऐसे बच्चे जब school, college या job में जाते हैं, तो उन्हें adjust करने में परेशानी होती है।
Real-Life Situation
एक बार counseling session में एक 14 साल का student आया, जिसे school में behavior issues के कारण refer किया गया था। उसकी mother ने कहा:
👉 “मैं उसे कभी मना नहीं करती, मैं चाहती हूँ कि वो मुझसे खुलकर बात करे।”
लेकिन reality यह थी कि – बच्चा teachers की बात नहीं मानता था, rules follow नहीं करता था। छोटी-छोटी बात पर गुस्सा हो जाता था। जब हमने धीरे-धीरे boundaries set करना शुरू किया—जैसे screen time limit, fixed routine—तो शुरू में resistance आया, लेकिन कुछ हफ्तों बाद behavior में positive change दिखने लगा।
यह example दिखाता है कि love के साथ limits भी उतनी ही जरूरी हैं।
Permissive Parenting vs Balanced Parenting
Permissive parenting में: प्यार ज़्यादा होता है, rules कम होते हैं।
Balanced (Authoritative) parenting में: प्यार भी होता है और clear boundaries भी होती हैं।
👉 “Healthy parenting वह है जहां बच्चा सुना भी जाता है और सही दिशा भी दी जाती है।”
Parents क्या बदलाव कर सकते हैं? (Practical Tips)
अगर आपको लगता है कि आप permissive parenting कर रहे हैं, तो छोटे-छोटे बदलाव से शुरुआत करें:
1. Clear rules बनाइए
घर में कुछ basic rules तय करें (sleep time, study time, screen time).
2. “ना” कहना सीखिए
हर demand पूरी करना जरूरी नहीं है।
3. Consistency रखें
आज जो rule है, उसे कल भी follow करें।
4. Calm discipline अपनाएं
गुस्से में नहीं, बल्कि समझाकर discipline करें।
5. Emotional connection बनाए रखें
प्यार और support हमेशा दिखाइए, लेकिन boundaries के साथ।
Love के साथ Limits भी जरूरी हैं।

हर parent अपने बच्चे को खुश देखना चाहता है, और इसमें कोई गलत बात नहीं है।
लेकिन सिर्फ खुशी ही नहीं, बल्कि बच्चे को real world के लिए तैयार करना भी parenting का हिस्सा है।
👉 “बच्चे को हर चीज़ देना आसान है, लेकिन सही समय पर ‘ना’ कहना ही असली parenting है।”
याद रखिए—
